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NEET-UG 2026 पेपर लीक कांड: 24 लाख छात्रों के भविष्य पर संकट, सड़कों से संसद तक बवाल, CBI जांच में खुल सकते हैं बड़े नाम

By Stalin • May 12, 2026 • 1 min read

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देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। लाखों छात्रों के सपनों से जुड़ी इस परीक्षा को केंद्र सरकार ने रद्द कर दिया है। आरोप है कि परीक्षा से पहले एक कथित “गेस पेपर” देशभर में व्हाट्सएप और कोचिंग नेटवर्क के जरिए फैलाया गया, जिसके 100 से अधिक सवाल असली परीक्षा से मेल खाते पाए गए। अब यह मामला सिर्फ पेपर लीक तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह देश की परीक्षा प्रणाली, सरकारी एजेंसियों और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल बन चुका है।

3 मई 2026 को आयोजित हुई NEET-UG परीक्षा में लगभग 24 लाख छात्रों ने हिस्सा लिया था। लेकिन परीक्षा के कुछ दिनों बाद राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) को एक ऐसे “गेस पेपर” की जानकारी मिली, जिसमें करीब 410 सवाल थे। जांच में पाया गया कि इनमें से 100 से अधिक प्रश्न वास्तविक प्रश्नपत्र से मिलते-जुलते थे। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि लगभग 600 अंकों के बराबर सवाल पहले से सर्कुलेट हो चुके थे।

मोबाइल-फ्रेंडली राजनीतिक कार्टून जिसमें ऊपर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनावी रैली को संबोधित करते दिख रहे हैं, जबकि नीचे धूप में बैठे परेशान NEET छात्र पेपर लीक के खिलाफ न्याय की मांग कर रहे हैं।

कैसे फैला कथित पेपर?

जांच एजेंसियों के मुताबिक यह कथित प्रश्नपत्र सबसे पहले राजस्थान के चूरू से जुड़े एक MBBS छात्र के जरिए सामने आया, जो फिलहाल केरल के एक मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई कर रहा था। आरोप है कि उसने यह सामग्री सीकर के एक व्यक्ति को भेजी। इसके बाद यह दस्तावेज कोचिंग नेटवर्क, पीजी हॉस्टलों और व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए तेजी से फैल गया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, परीक्षा से दो दिन पहले यह सामग्री लाखों रुपये में बेची जा रही थी। जांच टीम को कुछ चैट्स भी मिली हैं, जिनमें “Forwarded Many Times” का टैग दिखाई दिया। राजस्थान, उत्तराखंड और महाराष्ट्र तक इस नेटवर्क के फैलने की आशंका जताई जा रही है।

NTA की सफाई और फिर अचानक परीक्षा रद्द

शुरुआत में राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने किसी बड़े लीक से इनकार किया था। एजेंसी ने कहा था कि परीक्षा “फुल सिक्योरिटी प्रोटोकॉल” के तहत कराई गई थी। NTA के अनुसार प्रश्नपत्र GPS ट्रैकिंग वाले वाहनों से भेजे गए थे, AI आधारित CCTV निगरानी थी, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन किया गया था और 5G जैमर भी लगाए गए थे।

लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी और राजस्थान SOG ने सवालों के मिलान की पुष्टि की, सरकार पर दबाव बढ़ता गया। आखिरकार 12 मई को NTA ने परीक्षा रद्द करने की घोषणा कर दी। एजेंसी ने कहा कि “परीक्षा की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने” के लिए यह फैसला लिया गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि छात्रों को दोबारा आवेदन नहीं करना होगा और उनकी फीस वापस की जाएगी।

केंद्र सरकार और CBI की एंट्री

मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने जांच CBI को सौंप दी है। केंद्रीय एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह केवल “गेस पेपर” था या संगठित तरीके से किया गया पेपर लीक।

सूत्रों के मुताबिक, CBI अब इस बात की जांच करेगी कि क्या इस पूरे नेटवर्क में कोचिंग माफिया, शिक्षा संस्थानों के लोग, या किसी सरकारी एजेंसी के अंदर बैठे कर्मचारी शामिल थे। कुछ रिपोर्ट्स में पूर्व सरकारी अधिकारियों के नाम भी सामने आने की बात कही गई है। राजस्थान SOG ने अब तक 20 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया है।

विपक्ष का हमला: “NEET अब परीक्षा नहीं, नीलामी बन चुका है”

इस पूरे मामले पर विपक्ष ने मोदी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि “NEET अब परीक्षा नहीं, बल्कि नीलामी बन चुकी है।” उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा से 42 घंटे पहले सवाल व्हाट्सएप पर बिक रहे थे और सरकार युवाओं के भविष्य की रक्षा करने में पूरी तरह विफल रही है।

राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में देशभर में 89 पेपर लीक हुए और 48 बार परीक्षाएं दोबारा करानी पड़ीं। उन्होंने केंद्र सरकार के “अमृत काल” पर तंज कसते हुए कहा कि यह अब “विष काल” बन चुका है।

कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI ने दिल्ली में बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया। शास्त्री भवन के बाहर छात्रों और कार्यकर्ताओं ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित रखने में नाकाम रही है।

छात्रों का दर्द: “हम पढ़ें या सिस्टम से लड़ें?”

परीक्षा रद्द होने के बाद देशभर में छात्रों में गुस्सा और निराशा दोनों दिखाई दे रहे हैं। कई छात्रों का कहना है कि उन्होंने दो-दो साल तक तैयारी की, लेकिन अब उन्हें दोबारा मानसिक दबाव और अनिश्चितता का सामना करना पड़ेगा।

दिल्ली, पटना, जयपुर, कोटा और लखनऊ समेत कई शहरों में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किए। सोशल मीडिया पर #NEETCancel और #JusticeForStudents ट्रेंड करने लगा। छात्रों का कहना है कि हर साल परीक्षा में किसी न किसी प्रकार का विवाद सामने आना अब सामान्य हो गया है।

क्या फिर दोहराया जा रहा है 2024 का इतिहास?

यह विवाद इसलिए भी बड़ा माना जा रहा है क्योंकि 2024 में भी NEET परीक्षा पेपर लीक और ग्रेस मार्क्स विवाद के कारण देशभर में चर्चा में रही थी। उस समय भी मामला सुप्रीम कोर्ट और CBI तक पहुंचा था। हालांकि अदालत ने बड़े पैमाने पर दोबारा परीक्षा कराने से इनकार कर दिया था, लेकिन कई गिरफ्तारियां हुई थीं।

अब 2026 में फिर उसी तरह के आरोप सामने आने से NTA की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक परीक्षा संचालन में तकनीकी सुरक्षा के साथ-साथ जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक इस तरह की घटनाएं रुकना मुश्किल है।

असली सवाल: जिम्मेदार कौन?

इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर जिम्मेदार कौन है? क्या यह केवल कोचिंग माफिया और कुछ छात्रों का नेटवर्क था, या फिर परीक्षा प्रणाली के अंदर तक पहुंच रखने वाले लोग इसमें शामिल थे?

CBI जांच अब इसी दिशा में आगे बढ़ रही है। यदि जांच में सरकारी एजेंसियों या NTA के अंदर किसी की भूमिका सामने आती है, तो यह देश के सबसे बड़े शिक्षा घोटालों में से एक बन सकता है।

फिलहाल लाखों छात्र नई परीक्षा तारीखों का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारत की प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था सिर्फ मेहनत का नहीं, बल्कि भरोसे का भी इम्तिहान बन चुकी है।

Stalin

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