पटना (3 जून, 2026): पटना की पढ़ाई वाली गलियों में मंगलावर (2 जून, 2026) की रात करीब 10:00 बजे सिर्फ अफरा-तफरी नहीं, बल्कि एक गहरा खौफ पसर गया। वह खौफ जो किताबों के पन्नों में दर्ज नहीं होता, लेकिन किसी गरीब छात्र की आंखों में साफ पढ़ा जा सकता है। मुसल्लहपुर हाट (कदमकुआं थाना क्षेत्र)—जहां हजारों लड़के-लड़कियां अपने घरों से दूर, आंखों में सुनहरे भविष्य का सपना लिए आते हैं—वहां खान सर के ‘खान ग्लोबल कोचिंग संस्थान’ के बाहर हुई इस हिंसक वारदात ने पूरे बिहार को झकझोर कर रख दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंगलवार रात जब संस्थान में ऑनलाइन बैच चल रहे थे, तभी अचानक 15-20 असमाजिक तत्वों ने धावा बोल दिया। हमलावरों ने संस्थान के बाहर जमकर तोड़फोड़ की, पत्थरबाजी की और वहां लगे पोस्टरों को फाड़ दिया। इस दौरान बीच-बचाव करने आए सुरक्षा गार्ड पर जानलेवा हमला किया गया, जिससे उसका सिर फट गया और उसे लहूलुहान हालत में नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस घटना के बाद बुधवार (3 जून) की सुबह बड़ी संख्या में आक्रोशित छात्र संस्थान के बाहर जमा हो गए और सुरक्षा की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन करने लगे।
लेकिन इस पूरे घटनाक्रम को सबसे ज्यादा विस्फोटक बनाया खान सर के एक संगीन आरोप और उसके बाद आए नाटकीय मोड़ ने।
“बगल वाला कोचिंग”: वो आरोप और ‘फायरिंग’ पर सस्पेंस
घटना के ठीक बाद मीडिया से बात करते हुए खान सर ने बेहद चौंकाने वाला दावा किया था। उन्होंने कहा था, “मैने खुद मौके पर 8 से 10 राउंड गोलियां चलते देखीं और बम भी चलाए गए। हमलावरों ने दो दिन के भीतर कोचिंग को बम से उड़ाने की धमकी दी थी।” खान सर ने सीधे तौर पर “बगल वाले कोचिंग” के संचालकों पर इस हमले की साजिश रचने का शक जताया। उनके मुताबिक, बेहद कम फीस में गरीब बच्चों को पढ़ाना और भारी संख्या में रिजल्ट देना ही कुछ रसूखदार कोचिंग माफियाओं की आंखों की किरकिरी बन गया है।
मगर, बुधवार दोपहर तक इस मामले में एक नया मोड़ आ गया। पटना पुलिस की शुरुआती वैज्ञानिक जांच में मौके से फायरिंग या खोखा मिलने की पुष्टि नहीं हुई। पुलिस के इस स्टैंड के बाद खान सर भी अपने पहले बयान से पलट गए। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि रात में माहौल इतना तनावपूर्ण और अफरा-तफरी भरा था कि उन्हें सही से समझ नहीं आया; उन्होंने घबराहट में वही कह दिया जो घायल गार्ड ने उन्हें बताया था। दिलचस्प बात यह है कि पुलिस में दर्ज कराई गई आधिकारिक एफआईआर (FIR) में भी फायरिंग का जिक्र नहीं किया गया है।
पुलिस प्रशासन की त्वरित कार्रवाई: ‘ज्ञानबिंदु’ कोचिंग पर शिकंजा
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए पटना के सीनियर एसपी (SSP) कार्तिकेय के. शर्मा और कदमकुआं थाना प्रभारी (SHO) जन्मजय कुमार भारी पुलिस बल के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। पुलिस ने इलाके के करीब 20 सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की फुटेज को खंगाला, जिसमें हमलावर गार्ड से मारपीट और तोड़फोड़ करते साफ नजर आ रहे हैं।
पटना पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मामले का पटाक्षेप किया है:
- मुख्य साजिशकर्ता की पहचान: पुलिस की शुरुआती तफ्तीश में सामने आया कि यह पूरा विवाद ‘ज्ञानबिंदु कोचिंग सेंटर’ और खान सर के संस्थान के स्टाफ के बीच पुरानी रंजिश और व्यावसायिक प्रतिद्वंद्विता का नतीजा था।
- त्वरित गिरफ्तारियां: पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और चश्मदीदों के बयान के आधार पर ज्ञानबिंदु कोचिंग के डायरेक्टर समेत 3 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
- क्रॉस-एफआईआर: कदमकुआं थाने में दोनों पक्षों (खान क्लासेस और ज्ञानबिंदु) की ओर से लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसमें दूसरे पक्ष ने भी मारपीट का आरोप लगाया है।
मुसल्लहपुर हाट: जहां सपने किराए के कमरों में पलते हैं
मुसल्लहपुर हाट कोई आम मोहल्ला नहीं है। यह पटना की उस धड़कन का नाम है, जहां सरकारी नौकरियों की तैयारी करने वाले देश के सबसे जुझारू युवा बसर करते हैं। यहां किसी के पिता हाड़-तोड़ मेहनत करने वाले किसान हैं, तो किसी की मां ने अपने गहने गिरवी रखकर फीस भरी है। यहां का हर संकरा कमरा एक मुकम्मल कहानी है और हर छात्र अपने परिवार की आखिरी उम्मीद।
ऐसे संवेदनशील इलाके में अगर किसी नामचीन शिक्षक के संस्थान पर सरेआम हमला होता है, तो उसकी गूंज सिर्फ ईंट-दीवारों तक नहीं रुकती। वह सीधे इन मासूम छात्रों के हौसलों पर चोट करती है। एहतियातन और तनाव को देखते हुए कोचिंग को अगले आदेश तक बंद रखने की खबरें हैं, जिससे सबसे बड़ा नुकसान उस लाचार परिवार का हो रहा है जिसने अपने बच्चे को शहर भेजते वक्त कहा था—“बेटा, बस मन लगाकर पढ़ लेना।”
निष्कर्ष: यह हमला अगर सच है, तो निशाना सिर्फ खान सर नहीं…
यह वाकया तस्दीक करता है कि जब शिक्षा पूर्णतः बाजार बन जाती है, तो छात्र महज ‘ग्राहक’ और शिक्षक एक-दूसरे के ‘व्यावसायिक दुश्मन’ बन जाते हैं। फिर वहां ज्ञान और विमर्श की जगह… संख्या बल, मोटी फीस, वर्चस्व और बाहुबल की भाषा हावी होने लगती है।
अगर यह हमला वाकई सस्ती शिक्षा के मॉडल को ध्वस्त करने और एकाधिकार (Monopoly) जमाने की रंजिश का हिस्सा है, तो यकीन मानिए, यह हमला सिर्फ खान सर पर नहीं, बल्कि इस देश के करोड़ों गरीब छात्रों के सुनहरे कल पर हुआ है। हालांकि पुलिस ने आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजकर स्थिति को नियंत्रित कर लिया है, लेकिन पटना की इन तंग गलियों की सुरक्षा पर अब भी एक बड़ा सवालिया निशान है।
सवाल आज भी सीधा है—क्या हमारा गरीब बच्चा अब अपनी पढ़ाई भी इस कारोबारी डर के साए में रहकर करेगा, या प्रशासन उसे महफूज माहौल में ऊंचे सपने देखने का पूरा हक देगा?