📰 GlobalTimesHindi.com विशेष रिपोर्ट

नई दिल्ली, संसद भवन —
संसद के मानसून सत्र में आज एक बार फिर जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक, आरोप-प्रत्यारोप और भावनात्मक भाषणों ने संसद की गरिमा को राजनीतिक रणभूमि में बदल दिया। इस बहस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, गृह मंत्री अमित शाह, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, आप नेता संजय सिंह और कांग्रेस के गौरव गोगोई जैसे नेता केंद्र में रहे।


🔹 राहुल गांधी का हमला :

राहुल गांधी ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा:

“देश में लोकतंत्र को दबाया जा रहा है, सरकार सवालों से डरती है। मणिपुर जल रहा है और प्रधानमंत्री चुप हैं।”

उन्होंने आगे कहा,

“यह संसद जनता की आवाज़ है, और हम यहाँ उनके सवाल पूछने आए हैं, डरने नहीं।”


🔹 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पलटवार :

राहुल गांधी के भाषण पर जवाब देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा:

“कुछ लोग झूठ फैलाकर देश को गुमराह करना चाहते हैं। यह वही लोग हैं जिनकी पार्टी दशकों तक सत्ता में रही और जिन्होंने देश को लूटा।”

उन्होंने विपक्ष को ‘नकारात्मक राजनीति’ का प्रतीक बताया और कहा:

“भारत आज वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना रहा है, और कुछ लोगों को यह रास नहीं आ रहा।”


🔹 गृह मंत्री अमित शाह की दो टूक:

अमित शाह ने मणिपुर पर बहस के दौरान विपक्ष को आड़े हाथों लिया और कहा:

“मणिपुर की स्थिति पर राजनीति नहीं, समाधान चाहिए। लेकिन विपक्ष का रवैया जिम्मेदारी से दूर भागने जैसा है।”

उन्होंने राहुल गांधी के दौरे को “फोटो ऑप” करार दिया।


🔹 अखिलेश यादव का कटाक्ष:

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा:

“ये सरकार सिर्फ इवेंट करती है, जनता की बात सुनने में उनकी कोई रुचि नहीं है। संसद में जवाब देने से डरते हैं।”

उन्होंने सरकार से मांग की कि किसानों, बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दों पर गंभीर बहस हो।


🔹 गौरव गोगोई की भावुक अपील:

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा:

“मणिपुर की महिलाओं के साथ जो हुआ, वह देश के माथे पर कलंक है। सरकार को जवाब देना ही होगा।”

उन्होंने मोदी सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया और तत्काल जवाब की मांग की।


🔹 संजय सिंह की जोरदार एंट्री:

आप सांसद संजय सिंह, जिन्हें पहले निलंबित किया गया था, ने जैसे ही संसद में वापसी की, उन्होंने कहा:

“हमारी आवाज को दबाने से सच नहीं रुकेगा। अडाणी मुद्दे पर हमने सवाल पूछे थे, इसलिए हमें सस्पेंड किया गया।”

उन्होंने मोदी सरकार को “पूंजीपतियों की सरकार” कहा।


निष्कर्ष :

आज की कार्यवाही यह दर्शाती है कि संसद अब संवाद की नहीं, संघर्ष की जगह बनती जा रही है। विपक्ष सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा, वहीं सरकार अपना बचाव करने के साथ विपक्ष को कठघरे में खड़ा कर रही है।
यह भारतीय लोकतंत्र का एक नया और शोरगुल वाला अध्याय है — जिसमें हर पक्ष अपनी सियासी चाल चल रहा है, लेकिन आम जनता अब भी अपने सवालों का जवाब ढूंढ रही है।


🖋️ रिपोर्टर: सुरेंद्र यादव
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