(GlobalTimeshindi.com) — केरल की नर्स निमिषा प्रिया, जिन पर 2017 में यमन में एक हत्या के आरोप में, मृत्यु दंड का फैसला सुनाया गया था, उस फैसले को अब पूर्ण रूप से रद्द कर दिया गया है। यह जानकारी भारतीय ग्रैंड मुफ्ती, कांतपुरम ए. पी. अबुबकर मुसलियार के कार्यालय द्वारा दी गई पुष्टि पर आधारित है।घटनाक्रम का सारांश:
- फ़रवरी 2025 तक – यमन की अदालतों ने निमिषा की अपील को खारिज कर दिया था। उच्च न्यायालय में सभी कानूनी विकल्प समाप्त हो चुके थे।
- 16 जुलाई 2025 – निष्पादन की अंतिम तिथि तय की गई थी, लेकिन एक दिन पहले ही निष्पादन स्थगित किया गया।
- 29 जुलाई 2025 – उच्च स्तर की बातचीत और धार्मिक मध्यस्थता के बाद, यमन में बैठक आयोजित करके निमिषा का मृत्यु दंड पूरी तरह से रद्द करने का निर्णय लिया गया
कैसे हुई इस सफलता की कार्रवाई?
- धार्मिक मध्यस्थता:
भारत के ग्रैंड मुफ्ती, कांतपुरम ए. पी. एजु अबुबकर मुसलियार, ने अपनी धार्मिक प्रतिष्ठा का उपयोग करते हुए यमन के सुन्नी मुस्लिम नेताओं और धार्मिक विशेषज्ञों से संपर्क स्थापित किया और शेख हबीब उमर बिन हाफ़ील द्वारा तैयार की गई वैश्विक पहल को आगे बढ़ाया। - दीया (खून का मुआवजा):
यमन की इस्लामिक न्याय व्यवस्था में दोषी को मौत की सजा से बचाने का एक तरीका है: पीड़ित परिवार से माफ़ी प्राप्त कर दीया (compensation) देना। इसके लिए भारतीय समुदाय और सक्रिय कार्यकर्ता निधि भी जुटा चुके थे। - कूटनीतिक पहल:
भारतीय विदेश मंत्रालय, कानूनी सलाहकार, और संवादकर्ता मिलकर यमन में बातचीत की प्रक्रिया को समर्थन दे रहे थे। भारत सरकार द्वारा दूतावास सहायता, वकील प्रदान करना, और परिवार को यात्रा की अनुमती देना जैसे कई पहल किये गए। - सामूहिक प्रयास का सुनहरा फ़ल:
धर्म, मानवाधिकार और कूटनीति की संयुक्त भूमिका ने निर्मम हालात में मानुष्यता का प्रभावी संदेश दिया।
राज्य नेताओं की प्रतिक्रिया:
- केरल के मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन और विपक्षी नेता वी. डी. सतिश ने यह फैसला “आशा की किरण” बताया और कांतपुरम मुक्ती अभियान को ऐतिहासिक सफलता करार दिया। उन्होंने इस प्रयास में सभी मानवतावादी संगठनों और समुदाय की सराहना की।
निष्कर्ष
निमिषा प्रिया का यह मामला केवल व्यक्तिगत मुक्ति का नहीं, बल्कि संस्कृति, न्याय व इंसानियत का संदेश है। जिस मानव प्रेम, संयम, और समन्वित समुदाय भाव ने उसे यहाँ से बचाया — वह उम्मीदों से भरी कहानी है।
अब आगे क्या होगा?
- बेटी मिशेल की भावनात्मक अपील और उसे सही दिशा में समर्थन की उम्मीद जारी है।
- भारत सरकार और रणनीतिक दल यमन प्रशासन से कानूनी रूप से निष्पत्तिपत्र (official notification) की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
