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🕉️ “भक्ति या बलिदान? कांवर यात्रा से लौटे जतिन की दर्दनाक मौत ने झकझोरा पूरा गांव”
गन्नौर (हरियाणा), 29 जुलाई:
हरियाणा के सोनीपत जिले के गन्नौर क्षेत्र स्थित गांव पुरखास राठी से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। कांवर यात्रा पूरी करके लौटे 20 वर्षीय जतिन की मौत ने न सिर्फ उसके परिवार को गमगीन किया, बल्कि पूरे गांव को सदमे में डाल दिया। जतिन ने भगवान शिव को चढ़ाने के लिए 51 लीटर गंगाजल के साथ कांवर उठाई थी — लेकिन इस यात्रा की कीमत उसे अपनी जान से चुकानी पड़ी।
परिजनों के अनुसार, कांवर का भार अधिक होने के कारण जतिन के कंधे में गंभीर चोट आ गई थी। लेकिन श्रद्धा इतनी गहरी थी कि उसने यात्रा बीच में छोड़ने से इनकार कर दिया। दर्द से तड़पते हुए जतिन लगातार पेनकिलर दवाइयां लेता रहा, ताकि अपनी यात्रा पूरी कर सके।
🔱 श्रद्धा, अंधविश्वास और दबाव का त्रिकोण
गांव में मान्यता है कि अगर कोई कांवरिया अपनी यात्रा बीच में छोड़ दे या गंगाजल गिरा दे, तो वह भगवान शिव की नाराज़गी का शिकार हो सकता है। शायद इसी अंधश्रद्धा ने जतिन को मजबूर कर दिया कि वह दर्द के बावजूद चलते रहे।
जैसे ही यात्रा पूरी हुई, जतिन की तबीयत बिगड़ने लगी। डॉक्टरों के अनुसार पेनकिलर दवाओं की अधिकता से उसका लिवर और किडनी दोनों फेल हो गए। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
🛑 मौत जिसने कई सवाल खड़े कर दिए
क्या भगवान अपने भक्त से यह अपेक्षा करते हैं कि वह अपनी जान दांव पर लगाकर भक्ति करे?
क्या जतिन की मृत्यु धार्मिक आस्था थी, या अंधविश्वास और सामाजिक दबाव का परिणाम?
क्या यह समय नहीं है जब हम भक्ति के साथ विवेक का भी इस्तेमाल करें?
🙏 GlobalTimesHindi.com का संदेश:
भक्ति कभी बलिदान की मांग नहीं करती, बल्कि प्रेम, श्रद्धा और आत्मसमर्पण की अपेक्षा रखती है। जतिन की यह दर्दनाक मौत हम सबके लिए एक चेतावनी है कि धार्मिक कर्तव्यों को निभाते समय अपने शरीर और स्वास्थ्य की उपेक्षा न करें।
ईश्वर जतिन की आत्मा को शांति दे और समाज को यह समझ दे कि आस्था को विवेक के साथ जीना ही सच्ची भक्ति है।
📌 रिपोर्ट: GlobalTimesHindi.com टीम, गन्नौर (हरियाणा)
📅 दिनांक: 29 जुलाई 2025
