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योगी कैबिनेट विस्तार के बाद यूपी में सियासी संग्राम!

लेखक: Stalin • May 10, 2026 • 4 मिनट पढ़ें
योगी कैबिनेट विस्तार के बाद यूपी में सियासी संग्राम!
योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद BJP के भीतर असंतोष की हलचल तेज होती दिख रही है। बृजभूषण शरण सिंह के ट्वीट के बाद अब महिला विधायक की नाराजगी ने यूपी की राजनीति को और गर्म कर दिया है।
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बृजभूषण के बाद अब महिला BJP विधायक ने भी खोला मोर्चा, 2027 से पहले भाजपा में अंदरूनी हलचल तेज

उत्तर प्रदेश की राजनीति में रविवार को उस समय नया भूचाल आ गया, जब मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने अपनी सरकार 2.0 का दूसरा मंत्रिमंडल विस्तार किया। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले हुए इस विस्तार को भाजपा का “सामाजिक समीकरण साधने वाला मास्टरस्ट्रोक” बताया जा रहा है, लेकिन इसके साथ ही पार्टी के भीतर असंतोष की चिंगारियां भी खुलकर सामने आने लगी हैं।

जहां एक ओर पश्चिमी यूपी के जाट चेहरे और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष Bhupendra Chaudhary को कैबिनेट मंत्री बनाकर भाजपा ने बड़ा संदेश देने की कोशिश की, वहीं दूसरी ओर कई पुराने और प्रभावशाली चेहरे खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।

सबसे पहले भाजपा सांसद Brij Bhushan Sharan Singh का रहस्यमयी पोस्ट चर्चा में आया और अब एक महिला भाजपा विधायक की नाराजगी ने सियासी तापमान और बढ़ा दिया है।

अखिलेश यादव के बयान पर आधारित एक व्यंग्यात्मक राजनीतिक कार्टून, जिसमें योगी आदित्यनाथ और भाजपा नेताओं को चिंतित मुद्रा में दिखाया गया है, जबकि अखिलेश यादव तंज कसते नजर आ रहे हैं।
योगी कैबिनेट विस्तार के बाद समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उनका बयान अब यूपी की राजनीति में नए सियासी संग्राम का केंद्र बन गया है।

भाजपा का बड़ा चुनावी दांव: PDA बनाम NDA की तैयारी

योगी कैबिनेट विस्तार में भाजपा ने जातीय और क्षेत्रीय संतुलन पर खास फोकस किया है। पार्टी ने जाट, ओबीसी, दलित और ब्राह्मण वोट बैंक को साधने की कोशिश की है।

किन चेहरों को मिली जगह?

  • Bhupendra Chaudhary — जाट चेहरा, पश्चिमी यूपी में मजबूत पकड़
  • अजीत पाल सिंह और सोमेंद्र तोमर — प्रमोशन देकर स्वतंत्र प्रभार
  • हंसराज विश्वकर्मा — पूर्वांचल और ओबीसी समीकरण
  • पूजा पाल — दलित और महिला प्रतिनिधित्व का संदेश

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विस्तार सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी के PDA (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) फार्मूले की काट के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा 2027 से पहले हर उस सामाजिक वर्ग को साधना चाहती है, जहां हाल के महीनों में नाराजगी की खबरें सामने आ रही थीं।

बृजभूषण का ट्वीट बना चर्चा का केंद्र

कैबिनेट विस्तार से ठीक पहले भाजपा सांसद Brij Bhushan Sharan Singh ने सोशल मीडिया पर एक शेर पोस्ट किया—

“शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है,
जिस शाख पर बैठे हो, वो टूट भी सकती है।”

इस पोस्ट के बाद राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर शुरू हो गया। माना जा रहा है कि कैबिनेट में अपने समर्थकों को जगह न मिलने से बृजभूषण खेमे में नाराजगी है।

दिलचस्प बात यह है कि बृजभूषण लंबे समय से पूर्वांचल की राजनीति में बड़ा ठाकुर चेहरा माने जाते रहे हैं। लेकिन इस बार भाजपा ने सामाजिक समीकरणों में ओबीसी और गैर-यादव वोट बैंक पर ज्यादा जोर दिया है।

एक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक का कहना है—

“भाजपा अब 2027 को सिर्फ हिंदुत्व के भरोसे नहीं लड़ना चाहती। पार्टी को पता है कि जातीय समीकरण अब निर्णायक भूमिका निभाएंगे।”

महिला BJP विधायक की नाराजगी ने बढ़ाई टेंशन

कैबिनेट विस्तार के बाद अब भाजपा की एक महिला विधायक ने भी अप्रत्यक्ष रूप से नाराजगी जाहिर की है। पार्टी के अंदर चर्चा है कि कई महिला नेताओं को उम्मीद थी कि उन्हें मंत्रिमंडल में जगह मिलेगी, लेकिन अंतिम सूची में नाम न आने से असंतोष बढ़ा है।

सूत्रों के मुताबिक कुछ नेताओं का मानना है कि भाजपा ने “संगठन बनाम सरकार” की लड़ाई में संगठन के पुराने चेहरों को ज्यादा प्राथमिकता दी है।

यही वजह है कि सोशल मीडिया पर भाजपा के भीतर “साइलेंट डिसेंट” दिखाई देने लगा है।

अखिलेश यादव ने साधा निशाना

Akhilesh Yadav ने भी योगी सरकार पर हमला बोलते हुए तंज कसा—

“आखिरी 9 महीनों में ये मंत्री क्या कर लेंगे, जब 9 साल में सरकार कुछ नहीं कर सकी?”

सपा लगातार भाजपा के सामाजिक समीकरणों को चुनौती देने की कोशिश कर रही है। PDA फार्मूले के जरिए अखिलेश यादव पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वोट बैंक को एकजुट करने में लगे हैं।

भाजपा के लिए खतरे की घंटी?

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि भाजपा फिलहाल मजबूत स्थिति में जरूर है, लेकिन अंदरूनी असंतोष अगर बढ़ता गया तो 2027 के चुनाव में यह पार्टी के लिए चुनौती बन सकता है।

विशेषकर पश्चिमी यूपी, अवध और पूर्वांचल में टिकट वितरण और मंत्री पद को लेकर खींचतान आने वाले महीनों में और तेज हो सकती है।

भाजपा नेतृत्व फिलहाल इसे “सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया” बता रहा है, लेकिन पार्टी के भीतर उठती आवाजें संकेत दे रही हैं कि चुनाव से पहले सब कुछ पूरी तरह शांत नहीं है।

2027 की लड़ाई का ट्रेलर शुरू?

योगी कैबिनेट विस्तार सिर्फ मंत्री बनाने का कार्यक्रम नहीं था। यह 2027 विधानसभा चुनाव की शुरुआती बिसात है।

एक तरफ भाजपा सामाजिक इंजीनियरिंग के जरिए सत्ता बचाने की तैयारी कर रही है, तो दूसरी तरफ पार्टी के भीतर उपेक्षा और नाराजगी की फुसफुसाहटें अब सार्वजनिक होने लगी हैं।

सवाल यही है—
क्या भाजपा इन नाराज चेहरों को साध पाएगी,
या यही असंतोष 2027 में बड़ा राजनीतिक तूफान बन जाएगा?