ट्रंप के “Dead Economy” बयान पर भारत का करारा जवाब, रूस के साथ रणनीतिक संबंध अडिग

Stalin

July 31, 2025

रिपोर्ट: GlobalTimesHindi | अपडेटेड: जुलाई 2025

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत को “Dead Economy” (मरी हुई अर्थव्यवस्था) कहे जाने और भारतीय वस्तुओं पर 25% टैरिफ लगाने की धमकी के बाद भारत की राजनीतिक जमात में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा:

“मुझे फर्क नहीं पड़ता भारत रूस के साथ क्या करता है। वे अपनी मरी हुई अर्थव्यवस्थाओं को साथ लेकर डूब सकते हैं।”

उन्होंने भारत पर “उच्चतम टैरिफ” लगाने और अमेरिका के साथ “बहुत कम व्यापार” करने का भी आरोप लगाया — जबकि भारत और अमेरिका का द्विपक्षीय व्यापार 2024 में $129 बिलियन से अधिक रहा है।


भारत सरकार का कड़ा रुख: “हम राष्ट्रीय हित की रक्षा करेंगे”

हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पर सीधे बयान नहीं दिया, लेकिन विदेश मंत्रालय की ओर से साफ कहा गया:

“भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।”

यह संदेश स्पष्ट करता है कि भारत पर दबाव डालकर उसकी विदेश नीति को नहीं बदला जा सकता।


रूस के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी बनी रहेगी

भारत अभी भी रूस से हथियारों और ऊर्जा का एक बड़ा खरीदार है — और दूसरे सबसे बड़े रूसी तेल आयातक के रूप में चीन के बाद आता है।

भारत ने वर्षों में रक्षा उपकरणों के स्रोतों में विविधता लाने की कोशिश की है, लेकिन रूस की भूमिका अभी भी अहम है।


एस. जयशंकर: “हम अपने हितों के अनुसार फैसले लेते हैं”

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पहले भी स्पष्ट किया था:

“भारत के फैसले उसके राष्ट्रीय हितों पर आधारित होते हैं और हम दूसरों से इसकी इज्जत की अपेक्षा रखते हैं।”

उनका रुख यह दर्शाता है कि भारत किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।


विपक्ष का रुख

राहुल गांधी ने इस बयान पर प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन उन्होंने अतीत में कहा है:

“भारत की गरिमा का अपमान नहीं होना चाहिए। सरकार को राष्ट्र के लिए बोलना चाहिए।”

वहीं प्रियंका गांधी ने हाल में दिए एक इंटरव्यू में कहा:

“भारत की आवाज़ किसी भी वैश्विक शक्ति से कम नहीं होनी चाहिए।”


अखिलेश यादव: “भारत को धमकाने की कोई जरूरत नहीं”

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने संसद में पहले कहा था:

“भारत को अपनी स्वतंत्रता के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहिए — चाहे पूर्व हो या पश्चिम।”


टैरिफ के असर की आशंका

अगर 1 अगस्त से 25% टैरिफ लागू हो गया, तो विश्लेषकों के मुताबिक भारतीय निर्यात पर $10 बिलियन का प्रभाव पड़ सकता है — खासकर कपड़ा और श्रमिक आधारित क्षेत्रों में।

हालांकि, Apple जैसे ब्रांड्स के मोबाइल फोन फिलहाल इस टैरिफ से बाहर हैं।


भारत का साफ संदेश: “हम दबाव में नहीं आते”

जापान, दक्षिण कोरिया, और यूरोपीय संघ जैसे देश अमेरिका के दबाव में व्यापार समझौते करने को मजबूर हुए हैं, लेकिन भारत ने अपने स्टैंड को कायम रखा है

जैसा कि जयशंकर ने कहा था:

“हम वही करेंगे जो हमारे लिए सही है। और हर देश से अपने शर्तों पर संवाद करेंगे।”

भारत और रूस जहां रणनीतिक आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दे रहे हैं, वहीं अमेरिका की एकतरफा नीति अब सवालों के घेरे में है।


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