यह रहा आपका पूरा हिंदी लेख, जिसमें रक्षाबंधन का महत्व, परंपरा, और भारतीय नेताओं के X पोस्ट शामिल हैं —
रक्षाबंधन 2025: परंपरा, महत्व और भारतीय नेताओं के संदेश
रक्षाबंधन, जिसे भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का पर्व माना जाता है, इस वर्ष 9 अगस्त 2025 को पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाएगा। श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह त्योहार केवल एक धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द और एकता का प्रतीक भी है।

रक्षाबंधन का महत्व
इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनके अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना करती हैं। बदले में भाई उन्हें जीवनभर सुरक्षा का वचन देते हैं और उपहार स्वरूप कुछ भेंट करते हैं।
त्योहार का मूल संदेश है—“रक्षा और स्नेह का अटूट बंधन”।
इतिहास और मान्यताएं
रक्षाबंधन के पीछे कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं—
- महाभारत: द्रौपदी ने भगवान कृष्ण की उंगली कटने पर अपनी साड़ी का टुकड़ा बांधा था।
- यम और यमुनाजी: यमराज ने अपनी बहन यमुनाजी को अमरता का वरदान दिया।
- राजा बलि और लक्ष्मी: मां लक्ष्मी ने बलि राजा की कलाई पर राखी बांधी और भगवान विष्णु को वापस ले आईं।
भारतीय नेताओं के X पोस्ट (हिंदी में)
1. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
“सभी देशवासियों को रक्षाबंधन की अनेकानेक शुभकामनाएं।”
(अंग्रेजी में भी शुभकामना दी: Best wishes on the special occasion of Raksha Bandhan.)
2. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
“रक्षा बंधन के पावन अवसर पर, मैं भारत और विदेश में रह रहे सभी देशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देती हूं।”
3. मल्लिकार्जुन खड़गे (कांग्रेस अध्यक्ष)
“बहन-भाई के अटूट प्रेम, विश्वास और स्नेह के पर्व रक्षाबंधन की सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ।
रक्षाबंधन जाति, धर्म और पंथ से ऊपर उठकर आपसी भाईचारे और एकजुटता को बढ़ावा देता है।”
4. मायावती (बसपा प्रमुख)
“भाई-बहन के आपस के पवित्र रिश्ते एवं प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन के त्योहार की देश के समस्त भाई-बहनों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें।
लोग इसकी पवित्रता बनाए रखते हुए पूरे सौहार्द व उमंग के साथ मनाएं।”
5. तेजस्वी यादव (आरजेडी नेता)
“एक राखी और एक वोट…”
उन्होंने बिहार की बहनों को वादा किया कि अगर उनकी सरकार बनी तो महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा और रोजगार के लिए विशेष योजनाएं लागू होंगी, जिसमें 70,000 करोड़ रुपये का “शगुन” भी शामिल है।
सारांश
रक्षाबंधन का पर्व केवल राखी बांधने का अनुष्ठान नहीं, बल्कि आपसी विश्वास, प्रेम और जिम्मेदारी का संकल्प है। नेताओं के संदेश इस दिन को और भी खास बनाते हैं, क्योंकि वे न सिर्फ शुभकामनाएं देते हैं बल्कि सामाजिक एकता और महिला सशक्तिकरण का भी संदेश फैलाते हैं।
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