📍 झांसी, उत्तर प्रदेश | 30 जुलाई 2025
उत्तर प्रदेश के झांसी जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने न केवल बैंकिंग प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि मानवाधिकारों की भी खुलेआम धज्जियां उड़ाई हैं।
घटना के अनुसार, एक प्राइवेट माइक्रोफाइनेंस बैंक के वसूली एजेंटों ने लोन की बकाया किश्त नहीं चुकाने पर एक महिला को जबरन घर से उठा लिया और पांच घंटे तक बंधक बनाकर रखा। महिला की गोद में एक छोटा बच्चा भी था। जब उसका पति बैंक पहुंचा, तो उससे कहा गया— “किश्त दो, पत्नी को ले जाओ।”
कैसे हुआ मामला?
पीड़ित परिवार ने कुछ महीने पहले एक निजी फाइनेंस कंपनी से लोन लिया था। शुरुआती किश्तें तो समय पर दी गईं, लेकिन हाल में आर्थिक तंगी के कारण किश्त जमा करने में देर हो गई। इस पर बैंक वालों ने ज़्यादती की हद पार कर दी। पीड़िता के पति का आरोप है कि बिना किसी पूर्व सूचना के उसकी पत्नी को घर से उठाकर ले जाया गया और बैंक ऑफिस में घंटों बैठाकर रखा गया।
स्थानीय लोगों का गुस्सा भड़का
जब यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तो लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला। इलाके के लोगों ने इस घटना को “निजी बैंकिंग माफिया की गुंडागर्दी” करार दिया। कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय नेताओं ने इसकी कड़ी निंदा की और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
प्रशासन का क्या कहना है?
झांसी पुलिस ने इस मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि प्रथम दृष्टया यह वसूली एजेंटों की तरफ से की गई जबरदस्ती का मामला लग रहा है। पीड़ित परिवार की तहरीर के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है। संबंधित बैंक अधिकारियों से भी पूछताछ की जा रही है।
समाप्ति:
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि भारत में निजी फाइनेंस कंपनियों द्वारा लोन वसूली के नाम पर आम नागरिकों के साथ किस हद तक अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है। यह मामला केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि हर उस गरीब की कहानी है जो मजबूरी में लोन लेता है और फिर जाल में फंस जाता है।
