GlobalTimeshindi | 30 जुलाई 2025 | लंदन से
भारत और इंग्लैंड के बीच चल रही पांच मैचों की टेस्ट सीरीज़ अब अपने आखिरी और निर्णायक पड़ाव — ओवल टेस्ट — पर पहुंच चुकी है। लेकिन इससे पहले ही मैदान से बाहर एक गंभीर टकराव ने माहौल को और गर्म कर दिया है।
भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर और इंग्लैंड के ओवल स्टेडियम के पिच क्यूरेटर ली फोर्टिस के बीच विवाद सामने आया है, जिससे मुकाबले से पहले ही माहौल तनावपूर्ण हो गया है।
क्या हुआ था मैदान पर?
मंगलवार (29 जुलाई) को भारतीय टीम की प्रैक्टिस के दौरान ली फोर्टिस ने कोचिंग स्टाफ से कहा कि वे पिच से ढाई मीटर दूरी बनाए रखें, और कूलर या कोई भारी सामान पिच के पास न लाएं।
इस पर गौतम गंभीर ने आपत्ति जताई और कथित तौर पर क्यूरेटर से कहा:
“आप सिर्फ ग्राउंड्समैन हैं, हमें क्या करना है ये आप तय नहीं करेंगे। जो शिकायत करनी है, कर लीजिए।”
दोनों के बीच कुछ देर कहासुनी हुई, और फिर ईसीबी अधिकारियों ने मामला शांत कराया।
सीरीज़ की पृष्ठभूमि
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इंग्लैंड सीरीज़ में 2–1 से आगे है।
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पिछले टेस्ट में, जब इंग्लैंड ने ड्रा का ऑफर दिया, तब भारत ने खेलने का फैसला किया ताकि रवींद्र जडेजा और वॉशिंगटन सुंदर को शतक पूरा करने का मौका मिल सके।
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इंग्लैंड ने बीच में ही खेल छोड़ दिया और हाथ मिलाने से मना कर दिया, जिससे विवाद खड़ा हुआ।
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गंभीर ने इस पर तीखा जवाब देते हुए कहा:
“अगर इंग्लैंड के बल्लेबाज़ 96 या 99 पर होते, तो क्या वे भी ड्रा के लिए खेल रोकते?”
भारतीय उच्चायोग में गंभीर का संदेश
गंभीर ने लंदन में भारतीय उच्चायोग का दौरा किया और वहां टीम की तारीफ करते हुए कहा:
“हमने पिछले मैच में हर इंच के लिए लड़ाई लड़ी। हमने हार नहीं मानी। यही इस टीम का चरित्र है।”
उन्होंने खिलाड़ियों से अंतिम टेस्ट में पूरा जोर लगाने को कहा।
गंभीर का कोचिंग अंदाज़
गंभीर अपने बेबाक और जुनूनी स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। वह खिलाड़ियों को आत्मविश्वास और आक्रामक सोच के साथ खेलने के लिए प्रेरित करते हैं — जैसा उन्होंने 2011 वर्ल्ड कप फाइनल में दिखाया था।
उनकी कोचिंग शैली पुराने दौर के सौरव गांगुली और विराट कोहली जैसी कप्तानी की याद दिलाती है — आक्रामक, निष्कपट और भारत के लिए जी-जान देने वाला रवैया।
ओवल टेस्ट: अब असली जंग
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क्या भारत सीरीज़ को 2-2 से बराबर करेगा?
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क्या इंग्लैंड घरेलू मैदान पर जीत हासिल करेगा?
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क्या मैदान के बाहर की गर्मी, अंदर के खेल को प्रभावित करेगी?
इन सभी सवालों के जवाब अगले 5 दिनों में मिलेंगे। लेकिन एक बात तय है — यह मुकाबला सिर्फ बल्ले और गेंद का नहीं होगा, बल्कि जोश और जज़्बे का भी होगा।
निष्कर्ष
गंभीर और ग्राउंड्समैन के बीच की यह कहासुनी दिखाती है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में तनाव सिर्फ मैदान पर नहीं, बाहर भी होता है। लेकिन यही सब उस मुकाबले को खास बनाता है — जब राष्ट्र का सम्मान, टीम का आत्मविश्वास और खिलाड़ियों का जुनून दांव पर होता है।
ओवल टेस्ट अब सिर्फ खेल नहीं, सम्मान की लड़ाई बन गया है।
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